सावन और रमजान’ पर कवियित्री गोष्ठी आयोजित

सावन और रमजान दोनों उपासना एवं उपवास का पवित्र महीना है। एक में सभी धर्मचेता शिव की आराधना में रत रहते तो दूसरे में अल्लाह को हर समय स्मरण करते हुए कुरान-पाठ व तरावीह अता की जा रही है। शुक्रवार को रायसर में इस विषय स्पृहणीय कवियित्री गोष्ठी दोनों धर्म की छात्राओं ने की।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से निर्धारित विषय ‘सावन और रमजान’ विषय पर छात्राओं ने एकल काव्यपाठ किया। मोहिनी कुमारी गुप्ता ने सुनाया ‘हृदयांगन जब झूमे तब सावन आया समझो.’। तब हुस्नेआरा ने पढ़ा- ‘खुदा का नाम लेकर जो ततन से गद्दारी करते.।’ फिर साक्षी ने लरजते अंदाज में सुनाया ‘कली-कली ने ली अंगड़ाई, फूल-फूल पर यौवन छाया..’। रेशमी हर शय में खुदा को देखती हैं-‘तेरे जलवे में मुझे हर पल खुदा का नूर नजर आता है.’ के बाद श्वेता सहाय ने पढ़़ा ‘नील गगन पर बिखरे तारे दुल्हन का आंचल लगते हैं..।’ जूबी गुलरेज की बानगी थी- ‘बिन तेरे जिंदगी में फकत तन्हाई है..’। मेधा शर्मा सावन से मायूस लगीं-सूखा सावन बीत रहा, भादो में बरसेंगे नैन..। शमा ने बयां किया ‘सावन में हरियाली का मोहक विस्तार देखा है..’। अंत में मुस्कान ने सुनाया इंद्रधनुष सी छिटकी किरणें, सूरज की बिखरी है लाली..।

Source: http://www.jagran.com/bihar/munger-9512588.html

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